📖 श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान श्रृंखला
अध्याय 2 : सांख्य योग
आज के श्लोक : 67 – 68
📝 इंद्रियों पर नियंत्रण क्यों आवश्यक है? – बुद्धि को भटकने से कैसे बचाएँ

🪔 श्लोक 67
संस्कृत श्लोक :
इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते।
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि॥67॥
📜 हिंदी अर्थ
भगवान Krishna कहते हैं –
जब मन इंद्रियों के पीछे-पीछे चलता है, तब वे इंद्रियाँ मनुष्य की बुद्धि को उसी प्रकार हर लेती हैं, जैसे तेज हवा पानी में चल रही नाव को बहा ले जाती है।
📚 विस्तृत व्याख्या
इस श्लोक में श्रीकृष्ण एक अत्यंत सुंदर उदाहरण देते हैं।
👉 समुद्र में चल रही नाव यदि तेज हवा के नियंत्रण में आ जाए, तो वह अपने मार्ग से भटक जाती है।
👉 उसी प्रकार यदि मन इंद्रियों के पीछे भागने लगे, तो व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्य से दूर हो जाता है।
👉 अनियंत्रित इच्छाएँ, लालच, क्रोध और मोह मनुष्य की निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं।
👉 इसलिए मन को इंद्रियों का दास नहीं, बल्कि स्वामी बनाना आवश्यक है।
यह श्लोक हमें सिखाता है:
- मन को इंद्रियों के पीछे नहीं भागने देना चाहिए
- आत्मसंयम सफलता की कुंजी है
- लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए
- विवेक और अनुशासन जीवन को सही दिशा देते हैं
❓ प्रश्न (MCQ)
Q1. श्रीकृष्ण ने बुद्धि के भटकने की तुलना किससे की है?
A. पर्वत से
B. नदी से
C. हवा से बहती नाव से
D. सूर्य से
✅ सही उत्तर : C. हवा से बहती नाव से
Q2. बुद्धि कब भटक जाती है?
A. जब मन शांत हो
B. जब मन इंद्रियों के पीछे चलता है
C. जब ध्यान किया जाए
D. जब सेवा की जाए
✅ सही उत्तर : B. जब मन इंद्रियों के पीछे चलता है
🪔 श्लोक 68
संस्कृत श्लोक :
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥68॥
📜 हिंदी अर्थ
हे Arjuna!
जिस व्यक्ति ने अपनी इंद्रियों को विषयों से पूरी तरह नियंत्रित कर लिया है, उसकी बुद्धि स्थिर हो जाती है।
📚 विस्तृत व्याख्या
इस श्लोक में श्रीकृष्ण पिछले श्लोक का समाधान बताते हैं।
👉 यदि मनुष्य अपनी इंद्रियों को नियंत्रित कर ले, तो उसकी बुद्धि स्थिर और मजबूत हो जाती है।
👉 स्थिर बुद्धि वाला व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार नहीं बदलता, बल्कि सिद्धांतों के अनुसार जीवन जीता है।
👉 ऐसा व्यक्ति सही निर्णय लेता है और जीवन में सफलता तथा शांति दोनों प्राप्त करता है।
👉 आत्मसंयम केवल आध्यात्मिक जीवन के लिए ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सफलता के लिए भी आवश्यक है।
यह श्लोक हमें सिखाता है:
- इंद्रिय नियंत्रण से मानसिक शक्ति बढ़ती है
- स्थिर बुद्धि सफलता का आधार है
- अनुशासित जीवन अधिक सफल होता है
- आत्मसंयम ही वास्तविक स्वतंत्रता है
❓ प्रश्न (MCQ)
Q1. किसकी बुद्धि स्थिर होती है?
A. जो क्रोध करता है
B. जो इंद्रियों को नियंत्रित करता है
C. जो केवल धन कमाता है
D. जो आलसी है
✅ सही उत्तर : B. जो इंद्रियों को नियंत्रित करता है
Q2. आत्मसंयम का क्या परिणाम होता है?
A. भ्रम
B. असफलता
C. स्थिर बुद्धि
D. क्रोध
✅ सही उत्तर : C. स्थिर बुद्धि
🔥 निष्कर्ष (Conclusion)
इन श्लोकों में श्रीकृष्ण हमें बताते हैं:
👉 अनियंत्रित इंद्रियाँ मनुष्य को उसके लक्ष्य से भटका सकती हैं।
👉 जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों को नियंत्रित कर लेता है, उसकी बुद्धि स्थिर और शक्तिशाली बन जाती है।
👉 आत्मसंयम केवल आध्यात्मिक उन्नति ही नहीं, बल्कि जीवन की हर सफलता का आधार है।
🌟 आज की प्रेरणा
“जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों का स्वामी बन जाता है, वही अपने भाग्य का निर्माता बनता है।”
🚀 आगे क्या होगा?
अगले श्लोक (69 – 70) में
👉 श्रीकृष्ण ज्ञानी और सामान्य व्यक्ति के दृष्टिकोण का अंतर समझाएंगे तथा सच्ची शांति प्राप्त करने का अद्भुत रहस्य बताएंगे।
✅ दोस्त, कल हम भगवद्गीता के अत्यंत प्रेरणादायक श्लोकों का अध्ययन करेंगे, जो सच्चे ज्ञानी की पहचान बताते हैं। 🙏📖✨
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