🛣️ शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे अब सतारा से गुजरेगा: संशोधित योजना को मिली मंजूरी, लागत ₹1 लाख करोड़ तक पहुंची

महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर–गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के संशोधित आराखड़े को मंजूरी दे दी है। अब यह महामार्ग सतारा जिले से भी होकर गुजरेगा, जिससे इसकी कुल लंबाई बढ़कर 856.765 किलोमीटर हो गई है और लागत लगभग ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच गई है।


🗺️ क्या है शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे परियोजना?

यह महाराष्ट्र का सबसे महत्वाकांक्षी पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है:

विवरणजानकारी
शुरुआती बिंदुपवनर, वर्धा (विदर्भ)
अंतिम बिंदुबांदा, सावंतवाड़ी, सिंधुदुर्ग (गोवा सीमा)
कुल लंबाई856.765 किमी (पहले 802.592 किमी थी)
लेन6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे
यात्रा समयनागपुर से गोवा मात्र 8 घंटे (अभी 18-21 घंटे लगते हैं)
कनेक्टिविटी13 जिले, 40 तालुके, 21 धार्मिक स्थल

📍 सतारा जिले को मिला बड़ा फायदा

संशोधित योजना के तहत सतारा जिले को पहली बार इस परियोजना में शामिल किया गया है।

क्या बदला:

  • पहले यह मार्ग वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, बीड़, लातूर, धाराशिव, सोलापूर, सांगली, कोल्हापूर और सिंधुदुर्ग से होकर जाता था
  • अब नांदेड़, हिंगोली, परभणी, धाराशिव, सोलापूर, सांगली, कोल्हापूर और सिंधुदुर्ग जिलों में मार्ग में बदलाव कर सतारा को जोड़ा गया
  • वर्धा, यवतमाल, बीड़ और लातूर जिलों में पुराना मार्ग यथावत रहेगा

💰 परियोजना लागत में भारी इजाफा

पहलेअब
लगभग ₹83,600 करोड़लगभग ₹1 लाख करोड़
802.592 किमी856.765 किमी

भूमि अधिग्रहण के लिए पहले ही ₹20,787 करोड़ की मंजूरी मिल चुकी है।


⚠️ किसान आंदोलन का असर और विवाद

इस संशोधन के पीछे का मुख्य कारण किसानों का तीव्र विरोध था:

  • कोल्हापूर और सांगली में किसानों ने जमकर विरोध किया था
  • खेती की जमीन और सिंचित क्षेत्र प्रभावित होने की चिंता थी
  • सरकार ने विरोध वाले क्षेत्रों को हटाकर नया मार्ग तय किया

हालांकि, विरोध अभी भी जारी है:
शक्तिपीठ महामार्ग विरोधी संघर्ष समिति के समन्वयक गिरीश फोंडे ने कहा, “सरकार ने केवल किसानों के घाव पर नमक छिड़कने का काम किया है। नया मार्ग भी सिंचित कृषि भूमि से होकर जाएगा। सतारा जिले में कोई शक्तिपीठ या प्रमुख तीर्थस्थल भी नहीं है। पिछले दो साल से विरोध कर रहे किसानों के साथ सरकार ने एक भी बैठक नहीं की।”


🚀 राज्य को मिलेंगे ये फायदे

🎯 धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

यह एक्सप्रेसवे 21 प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ेगा, जिनमें शामिल हैं:

  • महुर (रेणुकामाता शक्तिपीठ)
  • तुलजापुर (तुलजाभवानी मंदिर)
  • कोल्हापूर (महालक्ष्मी मंदिर)
  • पात्रादेवी (सिंधुदुर्ग)

📈 आर्थिक विकास

  • लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट में क्रांतिकारी सुधार
  • गोवा के बंदरगाहों तक तेज़ पहुंच
  • विदर्भ, मराठवाड़ा और कोकण का संतुलित विकास
  • रियल एस्टेट और उद्योगों में निवेश बढ़ेगा

📅 अगला कदम: भूमि अधिग्रहण

  • भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी
  • पहले की अधिसूचना रद्द कर दी गई थी, अब नई प्रक्रिया शुरू होगी
  • किसानों को बाजार दर से चार गुना मुआवजा देने का वादा

🧾 निष्कर्ष

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का सतारा जिले से गुजरना महाराष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह न केवल पश्चिम महाराष्ट्र की कनेक्टिविटी मजबूत करेगा, बल्कि राज्य के धार्मिक और आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगा। हालांकि, किसानों के विरोध को देखते हुए सरकार को संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा ताकि यह महत्वाकांक्षी परियोजना समय पर पूरी हो सके।


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