📖 श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान श्रृंखला
अध्याय 2 : सांख्य योग
आज के श्लोक : 5 – 6
📝 कर्तव्य बनाम भावनाएँ – अर्जुन का गहरा द्वंद्व

🪔 श्लोक 5
संस्कृत श्लोक :
गुरूनहत्वा हि महानुभावान्
श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके।
हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैव
भुञ्जीय भोगान् रुधिरप्रदिग्धान्॥5॥
📜 हिंदी अर्थ
Arjuna कहते हैं –
इन महान गुरुजनों को मारने से अच्छा है कि मैं इस संसार में भिक्षा मांगकर जीवन बिताऊँ।
क्योंकि इन्हें मारकर जो भोग मिलेगा, वह रक्त से सना हुआ होगा।
📚 विस्तृत व्याख्या
इस श्लोक में अर्जुन अपनी भावनाओं को और गहराई से व्यक्त करता है।
वह कहता है कि अपने गुरुजनों को मारकर प्राप्त किया गया सुख और धन पाप से भरा होगा।
👉 इसलिए वह कहता है कि वह भिक्षा मांगकर जीना ज्यादा उचित समझता है।
यह एक बहुत ही गहरा नैतिक विचार है —
👉 “गलत तरीके से प्राप्त सफलता, असली सफलता नहीं होती।”
यह श्लोक हमें सिखाता है कि
- हमें अपने सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करना चाहिए
- गलत मार्ग से प्राप्त लाभ हमेशा दुःख देता है
❓ प्रश्न (MCQ)
Q1. अर्जुन क्या करना बेहतर मानता है?
A. युद्ध करना
B. राज्य लेना
C. भिक्षा मांगकर जीवन बिताना
D. भाग जाना
✅ सही उत्तर : C. भिक्षा मांगकर जीवन बिताना
Q2. अर्जुन के अनुसार गुरुजनों को मारकर प्राप्त भोग कैसा होगा?
A. सुखद
B. पवित्र
C. रक्त से सना हुआ
D. साधारण
✅ सही उत्तर : C. रक्त से सना हुआ
🪔 श्लोक 6
संस्कृत श्लोक :
न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो
यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः।
यानेव हत्वा न जिजीविषामः
तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः॥6॥
📜 हिंदी अर्थ
Arjuna कहते हैं –
हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिए क्या बेहतर है — उन्हें जीतना या उनसे हारना।
क्योंकि जिन्हें मारकर हम जीना भी नहीं चाहते, वे ही हमारे सामने खड़े हैं।
📚 विस्तृत व्याख्या
इस श्लोक में अर्जुन पूरी तरह भ्रमित हो जाता है।
वह कहता है कि उसे यह भी समझ नहीं आ रहा कि जीतना अच्छा है या हारना।
👉 क्योंकि दोनों ही स्थितियाँ उसके लिए दुखद हैं।
यह एक गहरा मानसिक द्वंद्व है —
👉 “जब हर रास्ता गलत लगे, तो क्या किया जाए?”
यह श्लोक हमें सिखाता है कि
- जीवन में कभी-कभी हम पूरी तरह भ्रमित हो जाते हैं
- ऐसे समय में सही मार्गदर्शन बहुत जरूरी होता है
❓ प्रश्न (MCQ)
Q1. अर्जुन किस बात को लेकर भ्रमित है?
A. युद्ध की जगह
B. जीत या हार में क्या बेहतर है
C. सेना की शक्ति
D. धन की कमी
✅ सही उत्तर : B. जीत या हार में क्या बेहतर है
Q2. अर्जुन किन्हें मारकर जीना नहीं चाहता?
A. शत्रुओं को
B. सैनिकों को
C. अपने स्वजनों को
D. राजाओं को
✅ सही उत्तर : C. अपने स्वजनों को
🔥 निष्कर्ष (Conclusion)
इन श्लोकों में अर्जुन का द्वंद्व अपने चरम पर है।
👉 वह
- सही और गलत के बीच उलझा है
- कर्तव्य और भावनाओं के बीच फंसा है
- और निर्णय लेने में असमर्थ है
👉 यही वह स्थिति है जहाँ से
भगवद्गीता का असली ज्ञान शुरू होता है।
🚀 आगे क्या होगा?
अगले श्लोक (7 – 8) में
👉 अर्जुन स्वयं को श्रीकृष्ण के शरण में सौंप देता है
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