📖 श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान श्रृंखला
अध्याय 2 : सांख्य योग
आज के श्लोक : 31 – 32
📝 कर्तव्य से पीछे हटना क्यों गलत है? – श्रीकृष्ण का धर्म उपदेश

🪔 श्लोक 31
संस्कृत श्लोक :
स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि।
धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते॥31॥
📜 हिंदी अर्थ
भगवान Krishna कहते हैं –
अपने क्षत्रिय धर्म को देखकर तुम्हें विचलित नहीं होना चाहिए,
क्योंकि धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर क्षत्रिय के लिए कोई दूसरा कल्याणकारी कार्य नहीं है।
📚 विस्तृत व्याख्या
इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन को उसके कर्तव्य (धर्म) की याद दिलाते हैं।
👉 अर्जुन एक क्षत्रिय (योद्धा) है, और अन्याय के खिलाफ युद्ध करना उसका धर्म है।
👉 इसलिए उसे भावनाओं में बहकर अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटना चाहिए।
👉 यहाँ श्रीकृष्ण यह समझा रहे हैं कि:
“जब उद्देश्य धर्म और न्याय की रक्षा हो, तब कर्तव्य निभाना सबसे बड़ा धर्म है।”
यह श्लोक हमें सिखाता है:
- अपने कर्तव्य से भागना नहीं चाहिए
- सही कार्य करना ही सच्चा धर्म है
- कठिन परिस्थितियों में भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए
❓ प्रश्न (MCQ)
Q1. अर्जुन का धर्म क्या था?
A. व्यापार
B. शिक्षा
C. क्षत्रिय धर्म (युद्ध)
D. तपस्या
✅ सही उत्तर : C. क्षत्रिय धर्म (युद्ध)
Q2. श्रीकृष्ण अर्जुन से क्या नहीं करने को कहते हैं?
A. युद्ध
B. शोक
C. विचलित होना
D. अध्ययन
✅ सही उत्तर : C. विचलित होना
🪔 श्लोक 32
संस्कृत श्लोक :
यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम्।
सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम्॥32॥
📜 हिंदी अर्थ
हे Arjuna!
ऐसा धर्मयुद्ध अपने आप प्राप्त होना खुले हुए स्वर्ग के द्वार के समान है।
भाग्यशाली क्षत्रियों को ही ऐसा अवसर मिलता है।
📚 विस्तृत व्याख्या
इस श्लोक में श्रीकृष्ण धर्मयुद्ध की महत्ता बताते हैं।
👉 यह युद्ध केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि धर्म और न्याय की रक्षा के लिए है।
👉 इसलिए इसे एक महान अवसर कहा गया है।
👉 श्रीकृष्ण अर्जुन को प्रेरित कर रहे हैं कि वह इस अवसर को भय या मोह के कारण न छोड़े।
यह श्लोक हमें सिखाता है:
- जीवन में सही कार्य करने का अवसर बहुत मूल्यवान होता है
- न्याय और सत्य के लिए खड़ा होना महानता है
- डर के कारण अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटना चाहिए
❓ प्रश्न (MCQ)
Q1. धर्मयुद्ध को किसके समान कहा गया है?
A. धन
B. स्वर्ग का द्वार
C. विजय
D. तपस्या
✅ सही उत्तर : B. स्वर्ग का द्वार
Q2. ऐसा युद्ध किन्हें प्राप्त होता है?
A. सभी लोगों को
B. केवल विद्वानों को
C. भाग्यशाली क्षत्रियों को
D. केवल राजाओं को
✅ सही उत्तर : C. भाग्यशाली क्षत्रियों को
🔥 निष्कर्ष (Conclusion)
इन श्लोकों में श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं:
👉 कर्तव्य से भागना उचित नहीं है
👉 धर्म और न्याय की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म है
👉 जब उद्देश्य सही हो, तो डर और मोह छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।
🚀 आगे क्या होगा?
अगले श्लोक (33 – 34) में
👉 श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्तव्य छोड़ने के परिणामों के बारे में बताते हैं
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