📖 श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान श्रृंखला
अध्याय 2 : सांख्य योग
आज के श्लोक : 45 – 46
📝 तीनों गुणों से ऊपर उठो – आत्मिक संतुलन का रहस्य

🪔 श्लोक 45
संस्कृत श्लोक :
त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन।
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्॥45॥
📜 हिंदी अर्थ
भगवान Krishna कहते हैं –
हे Arjuna!
वेद मुख्य रूप से प्रकृति के तीन गुणों (सत्त्व, रजस, तमस) से संबंधित हैं।
तुम इन तीनों गुणों से ऊपर उठो, द्वंद्वों से मुक्त रहो, स्थिर बुद्धि वाले बनो और आत्मा में स्थित रहो।
📚 विस्तृत व्याख्या
इस श्लोक में श्रीकृष्ण जीवन के तीन गुणों —
👉 सत्त्व (शुद्धता),
👉 रजस (इच्छा और क्रिया),
👉 तमस (अज्ञान और आलस्य)
के बारे में बताते हैं।
👉 श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि केवल इन गुणों के प्रभाव में मत रहो, बल्कि इनके ऊपर उठकर स्थिर और संतुलित बनो।
👉 “निर्द्वन्द्व” का अर्थ है — सुख-दुःख, लाभ-हानि जैसे द्वंद्वों से प्रभावित न होना।
यह श्लोक हमें सिखाता है:
- मानसिक संतुलन बहुत जरूरी है
- बाहरी परिस्थितियों से ऊपर उठना चाहिए
- आत्मिक शांति ही असली शक्ति है
❓ प्रश्न (MCQ)
Q1. प्रकृति के तीन गुण कौन से हैं?
A. ज्ञान, शक्ति, धन
B. सत्त्व, रजस, तमस
C. सुख, दुःख, शांति
D. धर्म, कर्म, मोक्ष
✅ सही उत्तर : B. सत्त्व, रजस, तमस
Q2. श्रीकृष्ण अर्जुन से क्या बनने को कहते हैं?
A. क्रोधित
B. लालची
C. स्थिर और संतुलित
D. भयभीत
✅ सही उत्तर : C. स्थिर और संतुलित
🪔 श्लोक 46
संस्कृत श्लोक :
यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके।
तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः॥46॥
📜 हिंदी अर्थ
जिस प्रकार चारों ओर जल से भरे बड़े सरोवर के मिलने पर छोटे कुएँ का महत्व कम हो जाता है,
उसी प्रकार आत्मज्ञान प्राप्त व्यक्ति के लिए वेदों के कर्मकांडों का महत्व कम हो जाता है।
📚 विस्तृत व्याख्या
इस श्लोक में श्रीकृष्ण एक सुंदर उदाहरण देकर आत्मज्ञान की महानता समझाते हैं।
👉 जब किसी व्यक्ति को बड़ा और पूर्ण ज्ञान मिल जाता है,
तो छोटी-छोटी बाहरी चीजों का महत्व कम हो जाता है।
👉 जैसे विशाल जलाशय मिलने पर छोटे कुएँ की आवश्यकता कम हो जाती है।
👉 उसी प्रकार आत्मज्ञान प्राप्त व्यक्ति बाहरी कर्मकांडों में नहीं उलझता,
बल्कि जीवन के वास्तविक सत्य को समझ लेता है।
यह श्लोक हमें सिखाता है:
- सच्चा ज्ञान सबसे बड़ा धन है
- गहरी समझ मिलने पर बाहरी दिखावे का महत्व कम हो जाता है
- आत्मज्ञान जीवन को नई दिशा देता है
❓ प्रश्न (MCQ)
Q1. बड़े जलाशय के मिलने पर किसका महत्व कम हो जाता है?
A. नदी
B. समुद्र
C. कुएँ
D. वर्षा
✅ सही उत्तर : C. कुएँ
Q2. आत्मज्ञान प्राप्त व्यक्ति किसमें नहीं उलझता?
A. सत्य में
B. कर्मकांडों में
C. ध्यान में
D. शांति में
✅ सही उत्तर : B. कर्मकांडों में
🔥 निष्कर्ष (Conclusion)
इन श्लोकों में श्रीकृष्ण हमें सिखाते हैं:
👉 जीवन के द्वंद्वों से ऊपर उठना चाहिए
👉 सच्चा ज्ञान आत्मिक संतुलन और शांति देता है
👉 जब इंसान आत्मज्ञान प्राप्त कर लेता है,
तो बाहरी दिखावे और मोह का प्रभाव कम हो जाता है।
🚀 आगे क्या होगा?
अगले श्लोक (47 – 48) में
👉 श्रीकृष्ण कर्मयोग का सबसे प्रसिद्ध सिद्धांत बताते हैं —
“कर्म करो, फल की चिंता मत करो”
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