ई-पीक पंजीकरण से वंचित किसान दोहरी संकट में; धान का भुगतान अटका, अब फसल ऋण का रास्ता भी बंद होने की आशंका

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📍 सिरोंचा | गढ़चिरौली

दुर्गम और आदिवासी बहुल सिरोंचा क्षेत्र के किसान इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। खरीफ सीजन 2025-26 में इंटरनेट नेटवर्क की भारी समस्या के कारण कई किसानों का ई-पीक (E-Peek) पंजीकरण नहीं हो सका। सरकार की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण दूरदराज के गांवों के किसानों को इसका सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।

ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सुविधा की लगातार समस्या के चलते किसानों को बार-बार सेवा केंद्रों, राजस्व कार्यालयों और इंटरनेट सुविधाओं का सहारा लेना पड़ा। इसके बावजूद तकनीकी बाधाओं और नेटवर्क की कमी के कारण अनेक किसानों का पंजीकरण अधूरा रह गया। परिणामस्वरूप अब कई किसान सरकारी योजनाओं से वंचित होने की आशंका जता रहे हैं।

इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही ई-पीक पंजीकरण से वंचित किसानों की फसलों का ऑफलाइन सर्वेक्षण करने के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया है। उपविभागीय अधिकारी की अध्यक्षता में तहसीलदार, समूह विकास अधिकारी और तालुका कृषि अधिकारी की समिति बनाई गई है। यह समिति खेतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

हालांकि जमीनी स्थिति यह है कि कई किसानों को धान बिक्री के बाद भी भुगतान नहीं मिला है। इससे किसान गंभीर आर्थिक तंगी में फंस गए हैं और आगामी खरीफ सीजन के लिए बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी का खर्च जुटाना भी मुश्किल हो गया है।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुछ बैंकों द्वारा यह कहा जाने लगा कि “ई-पीक पंजीकरण नहीं होने पर फसल ऋण मंजूर नहीं किया जाएगा।” इस वजह से किसानों में भारी चिंता और नाराजगी का माहौल है। विशेष रूप से छोटे और आदिवासी किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी ऑनलाइन व्यवस्था की खामियों का खामियाजा आम किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

स्थानीय किसान संगठनों और नागरिकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मांग की जा रही है कि ई-पीक पंजीकरण से वंचित किसानों को भी फसल ऋण उपलब्ध कराया जाए, धान का लंबित भुगतान तुरंत किया जाए और दुर्गम क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

किसान नेता मधुसूदन आरावेल्ली ने शासन को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि, “नेटवर्क नहीं होना किसानों की गलती नहीं है, फिर इसकी सजा किसानों को क्यों भुगतनी पड़े?” यह सवाल अब गांव-गांव में उठाया जा रहा है।

यदि समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी खरीफ सीजन में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है तथा अनेक किसानों के कर्ज के बोझ तले दबने की आशंका बढ़ गई है।

📌 ✍🏻 S. Rupesh, Chief Editor, DNI News
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